Friday, December 17, 2010

ताकि शादी हो पिक्चर परफेक्ट
सुबोध भारतीय
First Published:14-12-10 05:06 PM
Last Updated:14-12-10 05:07 PM
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शादी तय होने के बाद दूल्हा-दुल्हन के करीबी लोग तो शादी के आयोजन में जुट जाते हैं, मगर दूल्हा-दुल्हन के जिम्मे सबसे बड़ा काम रह जाता है-अपने लिए परिधान के चयन का। दोनों चाहते हैं कि इस शुभ मौके पर अपने करीबी और मेहमानों के बीच ऐसी पोशाक पहनें, जिससे उनका अंदाज और टेस्ट उसमें झलके और उनकी शादी के दिन सबकी नजर बस उन दोनों पर टिकी रहे। आइए जानें, आजकल क्या नया चल रहा है वेडिंग फैशन में:

दूल्हे की पोशाक और एक्सेसरीज

नब्बे के दशक से दूल्हों की मुख्य ड्रेस शेरवानी बन गई है। कल्पना कीजिए दूल्हा एक नॉर्मल सूट पहने है और उसके साथ दुल्हन एक भारी-भरकम लहंगा पहने खड़ी है। यह मिस मैच हो जाएगा, इसलिए शेरवानी दूल्हे के लिए उतनी ही महत्त्वपूर्ण बनती जा रही है, जितना दुल्हन के लिए लहंगा।

दिल्ली के प्रसिद्ध ग्रूम फैशन रिटेल चेन दीवान साहब के सुमित दीवान के अनुसार, ‘अब शेरवानी के बिना दूल्हे की कल्पना भी मुश्किल है।’ शेरवानी में क्रीम, फॉन, गोल्डन जैसे शेड्स प्रचलन में हैं। इनमें जरदोजी, ऊसरी और स्टोन का काम किया जाता है। साटन फैब्रिक इस समय ट्रैंड में है। वैसे फोर वूल, सिल्क और पॉलिस्टर की भी शेरवानियां बनवाई जा रही हैं। अगर आपके पास पैसे और समय की कमी नहीं है तो आप अपनी मर्जी का ऐसा कपड़ा भी बनवा सकते हैं, जिसमें आपका नाम बुना गया हो या आपका अपना पसंदीदा डिजाइन उस पर बना हो। अगर आप अपना यह शौक पूरा करना चाहते हैं तो आपको ज्यादा पैसा खर्च करने के लिए भी तैयार रहना होगा। शेरवानी की प्राइज रेंज 12,000 रुपये से शुरू होकर दो लाख रुपये तक है। महंगी शेरवानियों में डायमंड का भी इस्तेमाल किया जाता है। कुछ नया स्टाइल पहनने की इच्छा रखने वालों के लिए इंडो-वेस्टर्न एक अच्छा विकल्प है। इसमें शेरवानी की ऊंचाई छोटी कर दी जाती है और साथ में कम मोरी वाली पैंट पहनी जाती है। इसकी प्राइज रेन्ज भी शेरवानी के मुकाबले कम होती है। यह बारह हजार से नब्बे हजार के बीच उपलब्ध है। शेरवानी और इंडो-वेस्टर्न में एक दूसरा फर्क यह है कि शेरवानी के साथ जूतियां पहनी जाती हैं, जबकि इंडो-वेस्टर्न के साथ जूते। कुछ वेडिंग स्टोर्स इंडो-वेस्टर्न में फर्नीशिंग फैब्रिक भी इस्तेमाल कर रहे हैं।

दूल्हे के परिधान के साथ अन्य चीजें मिल कर उसकी पूरी रौनक बनाती है, जैसे जूतियां, सेहरा आदि। शेरवानी के कपड़े का इस्तेमाल करके मैचिंग जूतियां बनाई जाती हैं। इनमें बिना तुर्रे और तुर्रेदार जूतियों के अलावा पिशौरी जूतियां भी फैशन में हैं। पिशौरी जूतियां पीछे से खुली होती हैं, जिससे दूल्हे को आराम रहता है। जूतियों में वैसे राजस्थानी स्टाइल ही चलता है। जूतियों के अलावा सेहरे पर लगने वाली कलगी भी दूल्हे की रौनक बढ़ाती है। इसकी प्राइज रेंज 200 रु. से 1200 रु. तक होती है। इंडो-वेस्टर्न ड्रेस के साथ प्वॉइंटेड शूज लेटेस्ट ट्रेंड है। जूतियों की प्राइज रेंज 1400 से 3000 तक है, जबकि सेहरा 3100 से 11000 रुपये तक मिल जाता है।

दुल्हन के लिए खास

दुल्हन की ड्रेस पूरी शादी में आकर्षण का सबसे बड़ा केन्द्र होती है। किसी भी दुल्हन की हसरत होती है शादी का खूबसूरत जोड़ा। बॉम्बे सेलेक्शन के प्रदीप सूरी के अनुसार दुल्हन के लहंगे के कई विकल्प आजकल की शादियों में नजर आते हैं। क्रेप, नेट, जॉर्जेट और डय़ूपिन सिल्क के फैब्रिक हैं, जो लहंगा बनाने में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। दुल्हन पर लाल रंग ही फबता है। यही वजह है कि लाल, मेरून, मजेंटा और गाजरी रंग कभी फैशन से आउट नहीं होते। यदि दुल्हन कुछ अलग रंग पहनना चाहे तो पिंक और फिरोजी रंग चुने जा सकते हैं। इन लहंगों पर डायमंड, स्टोन्स, सीक्वेन्स और गोटा पट्टी का काम होता है। जरदोजी और कटवर्क भी ट्रैंड में हैं।

लहंगे दुल्हन की पसंद और शरीर की बनावट के अनुसार तैयार किए जाते हैं। इन दिनों तीन तरह के कट ट्रैंड में हैं- फिश कट, ए कट और अम्ब्रेला कट। फिश में लहंगा बॉडी की बनावट के अनुसार बनाया जाता है, ए-कट वाला लहंगा ऊपर से फिट और नीचे से खुला होता है। अम्ब्रेला कट में घुमावदार बड़ा-सा लहंगा होता है, जो राजस्थानी अंदाज में बना होता है। फ्रंटियर बाजार के प्रवीन शर्मा के अनुसार लहंगे की रेन्ज 30,000 से शुरू होकर 5-6 लाख तक जा सकती है।

(यह लेख हिंदुस्तान के १४ दिसंबर के अंक में प्रकाशित हुआ है)

Wednesday, December 1, 2010

प्लानिंग मस्त, वेडिंग मदमस्त
सुबोध भारतीय
First Published:29-11-10 01:02 PM
Last Updated:29-11-10 01:04 PM

First Published: 29-11-10 01:02 PMLast Updated:29-11-10 01:04 PM

सुबोध भारतीय
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हमारे देश में शादी-ब्याह का आयोजन एक ऐसे फेस्टिवल की तरह होता है, जो कई दिनों तक चलता है। शादी के आयोजन का मतलब ही उत्साह, उल्लास और आनंद होता है और यह मजा लेने के लिए आपको सही प्लानिंग करनी होगी। कैसे करें प्लानिंग, बता रहे हैं सुबोध भारतीय
रिश्ते की शुरुआत
किसी भी शादी की शुरुआत लड़का-लड़की को पसंद करवा कर संबंध जोड़ने से होती है। पहले आपसी लोगों के संबंध और संपर्कों के माध्यम से यह काम होता था, अब शादी व रिश्तों की वेबसाइट्स और अखबारों में मेट्रोमोनियल विज्ञापनों के जरिये रिश्ते ढूंढ़े जा रहे हैं। नेट से लड़का-लड़की के प्रोफाइल व फोटोज का आदान-प्रदान करना काफी सुविधाजनक हो गया है। सोशल नेटवर्किग साइट्स के जरिये भी यह काम हो रहा है।
रिश्ते को आगे बढ़ाने की अगली सीढ़ी लड़का-लड़की को आपस में मिलवा कर पसंद करवाने की है। इसके लिए स्थान का चयन महत्त्वपूर्ण है। पहले लड़की दिखाने के लिए मंदिर और पार्कों का इस्तेमाल होता था, अब इसकी जगह रेस्टोरेंट अथवा मॉल्स के फूड कोर्ट ने ले ली है। यहां दोनों के परिवारीजन आराम से बैठ कर एक दूसरे से परिचय बढ़ाते हैं और लड़का-लड़की को अलग टेबल पर तसल्ली से बातचीत करने के लिए छोड़ देते हैं। ऐसे में मेजबानी का दायित्व लड़की वाले ही उठाते हैं। कन्या पक्ष को हमारा सुझाव है कि वह मेहमानों की खातिरदारी दिल से करें, मगर इतना ज्यादा और आग्रहपूर्वक न करें कि वर पक्ष को उसका दबाव महसूस हो और वह सहज अनुभव न कर पाएं। इसी प्रकार वर पक्ष को चाहिए कि इस पहली मुलाकात में कन्या पक्ष का कम से कम खर्चा करवायें, ताकि यदि उन्हें इस रिश्ते से इंकार भी करना पड़े तो झिझक न हो। रिश्ता तय करते समय लड़का ही नहीं, लड़की से भी खुल कर सहमति लेनी आवश्यक है, आखिर दोनों को जीवनभर साथ निभाना है। दोनों की सहमति मिल जाने पर परिवारीजन लड़का या लड़की से अलग से बातचीत करके अपनी तसल्ली करें।
रिश्ता तय होने के बाद
लड़का-लड़की पसंद हो जाने के बाद सबसे पहला कार्य शादी की शुभ तारीख तय करने का होता है। इसमें दोनों पक्षों को अपने-अपने पंडितों आदि की राय ले लेनी चाहिए। यदि शुभ मुहुर्त्त एक से अधिक तारीखों का हो तो ऐसी तारीख चुनें, जिसमें ज्यादा शादियां न हों, क्योंकि ऐसा होने पर मेहमानों की संख्या कम रह जाती है। और ऐसे दिनों में सड़कों पर भी भीड़ अधिक होने से मेहमानों को आने में असुविधा भी होती है।
विवाह की तारीख तय हो जाने पर कुछ कार्य आपको सबसे पहले निबटाने होंगे, जैसे शादी के समारोहों के वेन्यू की बुकिंग, क्योंकि दिल्ली में आबादी बढ़ने के साथ ही अब अच्छे फार्म हाउस, बैंक्वेट हॉल्स और पंडालों की बुकिंग मुश्किल और महंगी होती जा रही है। देर से बुकिंग करने पर आपके पास च्वाइस ही नहीं रह जाती, इसलिए तारीख तय होते ही सबसे पहले वेन्यू की बुकिंग का कार्य करें।
इसी प्रकार से बैंड बाजे, ढोल, घोड़ी, बग्घी आदि की भी बुकिंग जल्द से जल्द करा लेनी चाहिए। क्योंकि जैसे-जैसे शादियों का सीजन करीब आने लगता है, इनके दाम भी दिन दूने रात चौगुने बढ़ने लगते हैं।
इसके बाद आप अपने उन मेहमानों की लिस्ट बनाएं, जिन्हें आप शादी में बुलायेंगे। इन्हें चार भागों में बांट लें- 1. रिश्तेदार, 2. मित्र, 3. पड़ोसी, 4 व्यवासायिक सहयोगी।
ऐसा करने से आप सभी मेहमानों की लिस्ट कवर कर पाएंगे। दूर-दराज से आने वाले रिश्तेदारों-मेहमानों को कार्ड छपने से पहले ही सूचना दे दें, ताकि वे अपनी तैयारी समय से कर सकें। उनके आगमन की पुष्टि भी अवश्य कर लें, ताकि आप उनके ठहरने आदि की उचित व्यवस्था कर पायें। मेहमानों की लिस्ट बनाते समय उनके आगे आने वाले संभावित सदस्यों की संख्या भी लिखते जाएं, ताकि आपको अपने मेहमानों की उचित संख्या का अंदाजा हो जाए। ऐसा करने से आपको व्यवस्था करने में बहुत आसानी होगी।
रिश्ता तय करते समय क्या देखें
यदि रिश्ता तय करते समय दोनों पक्षों को भली प्रकार जानने वाला व्यक्ति मध्यस्थ हो तो बेहतर होगा। दोनों पक्ष एक दूसरे पर भरोसा रख पाएंगे।
नेट या अखबार के विज्ञापनों के जरिये रिश्ता करने से पहले अड़ोस-पड़ोस से परिवार के बारे में जानकारी अवश्य लें। वैसे कई प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसियां भी दस से पंद्रह हजार रुपये लेकर यह जानकारी उपलब्ध कराती हैं।
लड़की दिखाने से पहले वर पक्ष का घर देखना चाहिए कि जिस घर में लड़की जाकर रहेगी, वह उनके स्तर और पसंद का है अथवा नहीं।
लड़की को प्राइवेट में पहली बार देखते समय वर पक्ष सिर्फ उन्हीं लोगों को लेकर जाए, जिनकी राय इस रिश्ते को कराने में मायने रखती है।
कन्या पक्ष लड़की दिखाते समय अनावश्यक दिखावा न करे और न ही कोई ऐसा झूठ बोले, जिसे आगे निभाना मुश्किल हो। मेहमाननवाजी भी हैसियत के अनुसार करें।
लड़की को चाहे वेस्टर्न कपड़े पहनाएं अथवा साड़ी-सूट, मगर वे सुरुचिपूर्ण होने चाहिए। अनावश्यक हैवी मेकअप न करवाएं।
लड़का-लड़की को स्वतंत्र रूप से बात करने के लिए अलग से स्थान व भरपूर समय दें।
लड़की या लड़के से परिवारीजन अनावश्यक सवाल-जवाब करके उन्हें असहज न करें। रेस्तरां या पब्लिक प्लेस पर बैठे हुए ऐसे स्वर में बात न करें कि आस-पास बैठे लोगों का ध्यान आप पर ही लगा रहे।
रिश्ते पर पूर्ण सहमति मिलने से पूर्व यदि लड़का-लड़की एक बार फिर मिलना चाहें तो उन्हें ऐसा करने दें।
यदि आप जन्मपत्री आदि मिलाने में यकीन रखते हैं तो यह कार्य लड़का-लड़की देखने से पहले ही कर लें।
लड़का-लड़की में से यदि कोई मांगलिक है तो यह बात पहले बता देनी चाहिए। बाद में पता चलने पर मन में वहम आते हैं तथा रिश्तों में खटास पैदा हो सकती है।
लड़का-लड़की को एक दूसरे की पसंद जान लेना भी आवश्यक है। उदाहरणार्थ लड़का घूमने-फिरने का शौक रखता है और लड़की को घर में रहना पसंद है तो आगे वैवाहिक जीवन में सामंजस्य बनाना मुश्किल हो सकता है।
लड़का-लड़की का कोई भी शारीरिक दोष या बीमारी भी पहले से खुल कर बता देनी चाहिए। बाद में यह बात खुलने पर रिश्तों में कड़वाहट या तनाव पैदा हो सकता है।
लड़कों के ड्रिंक करने या नॉनवेज खाने की बात पहले ही बता देनी चाहिए। कई लड़कियां ड्रिंक करने वाले लड़कों के साथ असहज महसूस करती हैं और शादी के बाद ऐसे लोगों के सोशल सर्कल में मूव नहीं कर पातीं।

Monday, November 15, 2010

ईको फ्रैंडली फर्नीचर भा जाए, छा जाए
सुबोध भारतीय
First Published:15-11-10 05:15 PM
Last Updated:15-11-10 05:15 PM
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देखा जाए तो ज्यादातर घरेलू फर्नीचर के निर्माण में लकड़ी का ही प्रयोग किया जाता है, जो सीधे-सीधे पर्यावरण को क्षति पहुंचाता है। इसके निर्माण में मशीनों का प्रयोग और इसकी पॉलिश आदि में जिन-जिन रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है, वे और भी पर्यावरण विरोधी हैं। इसलिए अब जागरूक व्यक्ति ईको फ्रैंडली फर्नीचर का चयन करके पर्यावरण-रक्षा में सहयोग दे रहे हैं।

क्या है ईको फ्रैंडली फर्नीचर
ऐसा फर्नीचर - जिसके निर्माण के लिए पेड़ों को न काटा जाए, ऐसे कैमिकल इस्तेमाल न किए जाएं, जो टॉक्सिक हैं और ऐसे पदार्थो का प्रयोग किया जाए, जो री-साइकल किए जा सकते हों- ईको फ्रैंडली फर्नीचर कहलाता है।

औद्योगिक और घरेलू वेस्ट को री-साइकल करके ईको फ्रैंडली फर्नीचर बनाया जाता है। केन, बांस और सरकंडे का उपयोग करके सुन्दर फर्नीचर बनाया जा रहा है, जो कहीं भी पर्यावरण को क्षति नहीं पहुंचाता। इनका उत्पादन प्रकृति बहुत बड़ी मात्र में और तेजी से करती है। असम, नागालैंड और उत्तराखंड में केन, बांस और सरकंडों की फसल भारी मात्र में होती है और यह वहां के लाखों लोगों की जीविका का साधन भी है। इस्पात, ग्लास, स्टोन और प्लास्टिक वो मैटीरियल हैं, जो आसानी से री-साइकल किए जा सकते हैं।

कैसे करें इनका चयन
अब बाजार में ईको-फ्रैंडली फर्नीचर आसानी से उपलब्ध है। फर्नीचर में वुड का जो भी विकल्प है, वह पर्यावरण रक्षक है-मसलन एमडीएफ (मीडियम डेंसिटी फाइबर बोर्ड) देखने में एकदम लकड़ी जैसा लगता है, बल्कि उसकी फिनिश लकड़ी से भी अच्छी होती है। कम्प्यूटर टेबल से लेकर सम्पूर्ण किचन तक एमडीएफ से बनाई जा रही हैं। यह विविध रंगों और आकार में उपलब्ध है। इसमें पॉलिश की भी जरूरत नहीं पड़ती। बाजार में इसकी बेशुमार वैरायटी उपलब्ध है।

इसी प्रकार बेंत, बांस और सरकंडे से बना फर्नीचर भारतीय संस्कृति में हमेशा रचा-बसा रहा है और इसका निर्माण भी गांव-देहातों में ही किया जाता था। मगर पिछले एक-दो दशकों से शहरों में इस प्रकार का फर्नीचर आसानी से मिलने लगा है। केन फर्नीचरकी वैरायटी ड्राइंग रूम के सोफा सेट, सेंटर टेबल से लेकर बैडरूम फर्नीचर तक उपलब्ध है। इस फर्नीचर की पॉलिश में ऐसे किसी भी कैमिकल या पेंट का इस्तेमाल प्राय: नहीं किया जाता, जो पर्यावरण को दूषित करे। बल्कि केन और बैम्बू फर्नीचर की पॉलिश-पेंट आप स्वयं भी कर सकते हैं। यह फर्नीचर परंपरागत व मॉडर्न दोनों प्रकार के डिजाइनों में उपलब्ध है। फर्नीचर के अतिरिक्त इनसे मैचिंग लैम्प शेड्स, झूमर, वॉल हैंगिंग आदि एक्सेसरीज भी आसानी से मिल जाती हैं।

रॉट आयरन का फर्नीचर भी ईको फ्रैंडली है, क्योंकि यह री-साइकल किया जा सकता है। केन और रॉट आयरन का कॉम्बिनेशन फर्नीचर को एक नई खूबसूरती तो देता ही है, टिकाऊ और मजबूत भी बना देता है। इसमें स्टोन का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

बाजार में अब रॉट आयरन, बेंत, बांस और स्टोन से बना विदेशी फर्नीचर भी आ गया है, जिसकी खूबसूरती और फिनिश लाजवाब है। दाम भी ज्यादा नहीं, अफोर्डेबल हैं। चीन, मलेशिया और इंडोनेशिया ऐसे देश हैं, जिनका ईको फर्नीचर जग प्रसिद्ध है।

ईको-फर्नीचर के साथ जूट फैब्रिक या जूट मैट्स का कॉम्बिनेशन आपके ड्राइंग रूम के ईको-फ्रैंडली लुक में चार चांद लगा देगा। इसी प्रकार सोफे की सीट की बुनाई में जूट की रस्सी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

कहां मिलते हैं ये फर्नीचर
-क्राफ्ट म्यूजियम, प्रगति मैदान, भैरों मार्ग, नई दिल्ली
-हैंडीक्राफ्ट एम्पोरियम, जनपथ, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली
-सभी राज्यों के एम्पोरियम, बाबा खड़क सिंह मार्ग, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली
-पुल मिठाई, आजाद मार्केट, दिल्ली (केन फर्नीचर की होलसेल मार्केट है)
-कीर्ति नगर (विदेशी ईको-फ्रैंडली फर्नीचर के लिए)

लाभ
-ईको फ्रैंडली फर्नीचर लकड़ी के फर्नीचर की तुलना में सस्ते हैं।
-इनके निर्माण की प्रक्रिया सरल है और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाती।
-ये वजन में हल्के होते हैं और आसानी से इन्हें पुनव्र्यवस्थित किया जा सकता है।
-इनकी मेंटेनेन्स आसान है और हर साल पॉलिश करवाने की जरूरत नहीं होती।
-परंपरागत और मॉडर्न दोनों प्रकार के डिजायनों में इनकी वैरायटी उपलब्ध है-होम इंटीरियर के लिए भी और आउटडोर गार्डन तथा लॉबी के लिए भी।
-सस्ते होने की वजह से इस फर्नीचर को बदलना जेब और दिल को तकलीफ नहीं देता।
-चार पांच साल में इसे बदल कर आप अपने घर को एक नया लुक दे सकते हैं।

साज-संभाल
-ईको फ्रैंडली फर्नीचर की यदि हर रोज झाड़-पोंछ की जाए तो यह सदा नया जैसा दिखेगा।
-ये वजन में हल्का होता है और इसलिए इसे समय-समय पर री-अरेंज करके ड्राइंग रूम की लुक बदल सकते हैं।
-टैराकोटा के गमलों में इंडोर प्लांट के साथ इस फर्नीचर का संयोजन घर के ईको फ्रैंन्डली लुक में चार चांद लगा देगा।
-केन और बांस के फर्नीचर को आप अपनी पसंद अनुसार डिजाइन भी करवा सकते हैं। इसके लिए होल सेल मार्केट जाएं।
-इन्हें टिकाऊ और मजबूत बनाने के लिए केन के साथ रॉट आयरन और स्टोन का भी इस्तेमाल करें।

(यह लेख हिंदुस्तान दैनिक के १६ नवम्बर के अंक में प्रकाशित हुआ है)

ईको फ्रैंडली फर्नीचर भा जाए, छा जाए
सुबोध भारतीय
First Published:15-11-10 05:15 PM
Last Updated:15-11-10 05:15 PM
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देखा जाए तो ज्यादातर घरेलू फर्नीचर के निर्माण में लकड़ी का ही प्रयोग किया जाता है, जो सीधे-सीधे पर्यावरण को क्षति पहुंचाता है। इसके निर्माण में मशीनों का प्रयोग और इसकी पॉलिश आदि में जिन-जिन रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है, वे और भी पर्यावरण विरोधी हैं। इसलिए अब जागरूक व्यक्ति ईको फ्रैंडली फर्नीचर का चयन करके पर्यावरण-रक्षा में सहयोग दे रहे हैं।

क्या है ईको फ्रैंडली फर्नीचर
ऐसा फर्नीचर - जिसके निर्माण के लिए पेड़ों को न काटा जाए, ऐसे कैमिकल इस्तेमाल न किए जाएं, जो टॉक्सिक हैं और ऐसे पदार्थो का प्रयोग किया जाए, जो री-साइकल किए जा सकते हों- ईको फ्रैंडली फर्नीचर कहलाता है।

औद्योगिक और घरेलू वेस्ट को री-साइकल करके ईको फ्रैंडली फर्नीचर बनाया जाता है। केन, बांस और सरकंडे का उपयोग करके सुन्दर फर्नीचर बनाया जा रहा है, जो कहीं भी पर्यावरण को क्षति नहीं पहुंचाता। इनका उत्पादन प्रकृति बहुत बड़ी मात्र में और तेजी से करती है। असम, नागालैंड और उत्तराखंड में केन, बांस और सरकंडों की फसल भारी मात्र में होती है और यह वहां के लाखों लोगों की जीविका का साधन भी है। इस्पात, ग्लास, स्टोन और प्लास्टिक वो मैटीरियल हैं, जो आसानी से री-साइकल किए जा सकते हैं।

कैसे करें इनका चयन
अब बाजार में ईको-फ्रैंडली फर्नीचर आसानी से उपलब्ध है। फर्नीचर में वुड का जो भी विकल्प है, वह पर्यावरण रक्षक है-मसलन एमडीएफ (मीडियम डेंसिटी फाइबर बोर्ड) देखने में एकदम लकड़ी जैसा लगता है, बल्कि उसकी फिनिश लकड़ी से भी अच्छी होती है। कम्प्यूटर टेबल से लेकर सम्पूर्ण किचन तक एमडीएफ से बनाई जा रही हैं। यह विविध रंगों और आकार में उपलब्ध है। इसमें पॉलिश की भी जरूरत नहीं पड़ती। बाजार में इसकी बेशुमार वैरायटी उपलब्ध है।

इसी प्रकार बेंत, बांस और सरकंडे से बना फर्नीचर भारतीय संस्कृति में हमेशा रचा-बसा रहा है और इसका निर्माण भी गांव-देहातों में ही किया जाता था। मगर पिछले एक-दो दशकों से शहरों में इस प्रकार का फर्नीचर आसानी से मिलने लगा है। केन फर्नीचरकी वैरायटी ड्राइंग रूम के सोफा सेट, सेंटर टेबल से लेकर बैडरूम फर्नीचर तक उपलब्ध है। इस फर्नीचर की पॉलिश में ऐसे किसी भी कैमिकल या पेंट का इस्तेमाल प्राय: नहीं किया जाता, जो पर्यावरण को दूषित करे। बल्कि केन और बैम्बू फर्नीचर की पॉलिश-पेंट आप स्वयं भी कर सकते हैं। यह फर्नीचर परंपरागत व मॉडर्न दोनों प्रकार के डिजाइनों में उपलब्ध है। फर्नीचर के अतिरिक्त इनसे मैचिंग लैम्प शेड्स, झूमर, वॉल हैंगिंग आदि एक्सेसरीज भी आसानी से मिल जाती हैं।

रॉट आयरन का फर्नीचर भी ईको फ्रैंडली है, क्योंकि यह री-साइकल किया जा सकता है। केन और रॉट आयरन का कॉम्बिनेशन फर्नीचर को एक नई खूबसूरती तो देता ही है, टिकाऊ और मजबूत भी बना देता है। इसमें स्टोन का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

बाजार में अब रॉट आयरन, बेंत, बांस और स्टोन से बना विदेशी फर्नीचर भी आ गया है, जिसकी खूबसूरती और फिनिश लाजवाब है। दाम भी ज्यादा नहीं, अफोर्डेबल हैं। चीन, मलेशिया और इंडोनेशिया ऐसे देश हैं, जिनका ईको फर्नीचर जग प्रसिद्ध है।

ईको-फर्नीचर के साथ जूट फैब्रिक या जूट मैट्स का कॉम्बिनेशन आपके ड्राइंग रूम के ईको-फ्रैंडली लुक में चार चांद लगा देगा। इसी प्रकार सोफे की सीट की बुनाई में जूट की रस्सी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

कहां मिलते हैं ये फर्नीचर
-क्राफ्ट म्यूजियम, प्रगति मैदान, भैरों मार्ग, नई दिल्ली
-हैंडीक्राफ्ट एम्पोरियम, जनपथ, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली
-सभी राज्यों के एम्पोरियम, बाबा खड़क सिंह मार्ग, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली
-पुल मिठाई, आजाद मार्केट, दिल्ली (केन फर्नीचर की होलसेल मार्केट है)
-कीर्ति नगर (विदेशी ईको-फ्रैंडली फर्नीचर के लिए)

लाभ
-ईको फ्रैंडली फर्नीचर लकड़ी के फर्नीचर की तुलना में सस्ते हैं।
-इनके निर्माण की प्रक्रिया सरल है और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाती।
-ये वजन में हल्के होते हैं और आसानी से इन्हें पुनव्र्यवस्थित किया जा सकता है।
-इनकी मेंटेनेन्स आसान है और हर साल पॉलिश करवाने की जरूरत नहीं होती।
-परंपरागत और मॉडर्न दोनों प्रकार के डिजायनों में इनकी वैरायटी उपलब्ध है-होम इंटीरियर के लिए भी और आउटडोर गार्डन तथा लॉबी के लिए भी।
-सस्ते होने की वजह से इस फर्नीचर को बदलना जेब और दिल को तकलीफ नहीं देता।
-चार पांच साल में इसे बदल कर आप अपने घर को एक नया लुक दे सकते हैं।

साज-संभाल
-ईको फ्रैंडली फर्नीचर की यदि हर रोज झाड़-पोंछ की जाए तो यह सदा नया जैसा दिखेगा।
-ये वजन में हल्का होता है और इसलिए इसे समय-समय पर री-अरेंज करके ड्राइंग रूम की लुक बदल सकते हैं।
-टैराकोटा के गमलों में इंडोर प्लांट के साथ इस फर्नीचर का संयोजन घर के ईको फ्रैंन्डली लुक में चार चांद लगा देगा।
-केन और बांस के फर्नीचर को आप अपनी पसंद अनुसार डिजाइन भी करवा सकते हैं। इसके लिए होल सेल मार्केट जाएं।
-इन्हें टिकाऊ और मजबूत बनाने के लिए केन के साथ रॉट आयरन और स्टोन का भी इस्तेमाल करें।

(यह लेख हिंदुस्तान दैनिक के १६ नवम्बर के अंक में प्रकाशित हुआ है)

Wednesday, November 10, 2010

कौन हैं बच्चों के रोल मॉडल्स
सुबोध भारतीय
First Published:10-11-10 05:08 PM
Last Updated:10-11-10 05:40 PM
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11वीं के स्टूडेंट अर्जुन बग्गा अपना रोल मॉडल आमिर खान को मानते हैं। ‘मिस्टर परफेक्शनिस्ट’ आमिर बच्चों में बहुत अच्छी तरह कनेक्ट कर पाते हैं। लगान, तारे जमीन पर और थ्री ईडियट्स में बच्चों को प्रेरित करने के लिए बहुत कुछ था, जो कि दिलचस्प तो था ही, बहुत आसान तरीके से समझाया भी गया था। अजरुन का कहना है-आमिर भले ही कम फिल्में करते हों, मगर उनकी फिल्में मीनिंगफुल और मनोरंजक होती हैं। फिल्म के हीरो आमिर खान को अपनी जिंदगी का हीरो मानने में कोई हर्ज नहीं गर्व होता है।

भारतरत्न डॉ. अब्दुल कलाम भी बहुत-से बच्चों के रोल मॉडल हैं। एक मछुआरे के बेटे कलाम की जिंदगी एक छोटे-से गांव से शुरू हुई थी। अपनी लगन, योग्यता और मेहनत के बल पर वह देश के शीर्षस्थ वैज्ञानिक बने। राष्ट्रपति बनने के बाद बच्चों से ज्यादा जुड़े और सभी बच्चों में लोकप्रिय हो गए। अपने कार्यकाल में तीन लाख स्कूली बच्चों से मिलकर उन्होंने भारत के भविष्य को एक नई संभावना और सोच दी। कलाम अंकल की बच्चों-जैसी मासूम हंसी और सादगी हर बच्चों को अच्छी लगती है।

सचिन तेंदुलकर ऐसे खिलाड़ी हैं, जो देश के ही नहीं, विदेश के भी लाखों बच्चों के रोल मॉडल बने हुए हैं। सचिन की स्कूली पढ़ाई भी पूरी नहीं हो पाई थी कि उन्हें बड़े बच्चों के बीच झोंक दिया गया। सचिन ने यह इम्तिहान तो पास किया, मगर अपने बचपन को खोकर।

11वीं कक्षा के छात्र कौशल को सचिन अपने रोल मॉडल इसलिए लगते हैं, क्योंकि उन्होंने सफलता के शिखर को छूकर भी अपनी शालीनता और गरिमा को बखूबी बनाए रखा है। कभी विवादों में नहीं पड़े। कौशल को बड़ा गर्व होता है जब विम्बलडन के मैदान में सचिन की उपस्थिति की घोषणा होते ही उनके सम्मान में सारे दर्शक खड़े होकर तालियां बजाते हैं। यही सम्मान सचिन ने अपने खेल और गरिमामय व्यवहार से सारी दुनिया की विपक्षी टीमों से भी हासिल किया है।

ऑस्कर जीतकर भारत की शान बढ़ाने वाले संगीतकार एआर रहमान के पिता का निधन उस समय हो गया था जब वह सिर्फ 16 वर्ष के थे। अपने घर को चलाने का बोझ रहमान के नाजुक कंधों पर आ गया। मगर रहमान ने यह बोझ बखूबी उठाया ही नहीं, अपितु अपनी बेजोड़ प्रतिभा से संगीत की दुनिया की परिभाषा ही बदल डाली। यही वजह है कि रहमान आज हजारों-लाखों बच्चों के रोल मॉडल बन चुके हैं। सचिन की ही तरह वह शर्मीले और सिम्पल हैं।

कृतिका गुप्ता को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपने रोल मॉडल लगते हैं, जो एक राजनेता न होकर भी एक काबिल और कुशल प्रधानमंत्री हैं। प्रधानमंत्री की योग्यता और सादगी अपने आप में एक मिसाल है। मनमोहन सिंह संभवत: विश्व के एक मात्र प्रधानमंत्री हैं, जो अर्थशास्त्री भी हैं। और यह हमारा सौभाग्य है कि देश की अर्थव्यवस्था और विकास इनके सुरक्षित हाथों में है।

9वीं कक्षा की छात्र प्रिया बत्रा को ब्यूटी और सक्सेस का अद्भुत कॉम्बिनेशन दिखता है-ऐश्वर्या राय बच्चन में। मिस वर्ल्ड बनने के बाद जिस तरह ऐश्वर्या ने खुद को फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित किया, वह एक मिसाल है। फिर अपनी अभिनय क्षमता और सुंदरता के बल पर अंतरराष्ट्रीय स्टार बनीं और कई विदेशी फिल्मों में हीरोइन बन देश का नाम ऊंचा किया।

कनिष्क हरभजनका को अमिताभ बच्चन अपने रोल मॉडल लगते हैं। कनिष्क के अनुसार, 68 वर्षीय अमिताभ में युवाओं से भी ज्यादा जोश बरकरार है। उनकी अभिनय क्षमता और गरिमामय उपस्थिति सभी को इम्प्रेस करती है। शायद यही वजह है कि यह बुजुर्ग अभिनेता यंग जनरेशन का रोल मॉडल हैं।

कम्युनिकेशन और टैक्नोलॉजी के इस युग में दुनिया तेजी से सिमटकर करीब आती जा रही है। कोई आश्चर्य ही बात नहीं कि आज बच्चों के रोल मॉडल स्वदेशी ही नहीं विदेशी आइकॉन्स भी बन गए हैं। दुनिया के सबसे धनी व्यक्तियों में शुमार किए जाने वाले बिल गेट्स और वॉरेन बफेट की अकूत संपत्ति से ज्यादा उनका उस संपत्ति के अधिकांश हिस्से को दान और समाज कल्याण के लिए बांटना, इम्प्रेस करता है।

दोस्तों, हमारे जो रोल मॉडल्स हैं, उनकी कहानी विपरीत परिस्थितियों से जूझकर ऊपर उठने की है। चाहे ए।आर. रहमान हों, अब्दुल कलाम या मनमोहन सिंह। इनका बचपन कठिन परिस्थितियों में बीता। ये मुंह में चांदी की चम्मच लेकर पैदा नहीं हुए थे। सच्चे हीरो वही होता है, जो जूझकर, फाइट करके विनर बनता है और दुनिया पर छा जाता है।

( यह लेख दैनिक हिंदुस्तान के ११ नवम्बर के अंक में प्रकाशित हुआ है)

Tuesday, November 2, 2010

घर के मेकओवर को दें फाइनल टच
लाइट्स, डेकोरेशन..एक्शन
सुबोध भारतीय
First Published:01-11-10 12:17 PM
Last Updated:01-11-10 12:19 PM
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रोशनी और खुशियों का त्योहार दीपावली अब आपके दरवाजे तक आ पहुंचा है। बाजार सज गए हैं और लोग खर्च करने के मूड में आ गए हैं। हर तरफ खुशी और उमंग का माहौल है..और क्यों न हो, आखिर दीपावली हमारे देश का सबसे बड़ा त्योहार है। कल धनतेरस के साथ ही दीपावली का पांच दिनों का उत्सव शुरू हो जाएगा।

ऐसे बदलें घर के फर्श और दीवारों का लुक

यदि आप अपने घर को पेंट कराने से चूक गए हैं तो कोई बात नहीं, इसे आप दिवाली के बाद के लिए टाल दीजिए। घर की अच्छी तरह सफाई कीजिए। इस काम को आप वैक्यूम क्लीनर की मदद लेकर जल्दी ही निबटा सकेंगे। घर को फेस्टिवल लुक देने के लिए पैसों से ज्यादा आपको अक्ल का इस्तेमाल करना होगा। आपके पास जो छोटे या मध्यम आकार के फ्लोर रग्स हैं, उन्हें मुख्य दीवारों पर टांग कर आप एक चमत्कारी इफेक्ट पैदा कर सकते हैं। अगर यह रग्स डार्क कलर के हैं तो और भी बेहतर होगा। ऐसा करने से आपके फ्लोर और वॉल्स दोनों का लुक ही बदल जाएगा।

रंगोली दिवाली की सजावट का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। दीवार पर सजावट का एक और ऑप्शन रंगोली सजाने का है। इसमें आजकल बाजार में मिलने वाली रंगोलियां भी इस्तेमाल की जा सकती हैं, जिन्हें दीवार पर चिपका कर नया लुक दिया जा सकता है। घर का मुख्य दरवाजा वंदनवार से जरूर सजाएं, मगर सुरुचिपूर्ण तरीके से, ताकि उससे आपका टेस्ट पता चले। मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं-फर्श का एक छोटा हिस्सा इस्तेमाल करें और गीले चॉक से रंगोली का आकार बनाएं। इसके बाद गुलाल के विभिन्न रंगों और चावलों से उसे सजाएं। चावलों को विभिन्न रंगों में रंग कर भी रंगोली बना सकते हैं।

अच्छा लुक देते हैं ये इनडोर प्लांट्स

घर के प्लांट्स अगर पूरे साल उपेक्षित पड़े रहे हैं तो अब वक्त आ गया है उनसे घर सजाने का। इनडोर प्लांट्स के एक-एक पत्ते को हल्के गीले कपड़े से साफ करें। उनके गमले यदि पुराने और टूट-फूट गए हैं तो बदल डालें। उन्हें खूबसूरत तरीके से पेंट करके एक पर्सनल टच दें। दिवाली के दिनों में ड्राइंग रूम में सजे-संवरे प्लांट्स बाहर के पॉल्यूशन से भी बचे रहेंगे और घर को भी एक अच्छा लुक देंगे।

ड्राइंग रूम में एक खूबसूरत चौड़ा पॉट पानी भर कर उसमें फूलों की खुशबूदार पत्तियां डाल दें। फिर रात्रि के समय उसमें फ्लोटिंग कैंडल्स (तैरने वाले दीये) जला दें। बेहतरीन समां दिखाई देगा।

खूबसूरत व कलात्मक दीये

धनतेरस से ही दीये जलने शुरू हो जाते हैं, जो भाईदूज तक जलाये जाते हैं। मुख्य द्वार और घर के कुछ मुख्य स्थानों पर प्रतिदिन जलने वाले दीये मिट्टी के बने हों और उन पर कुछ पेंट या ड्राइंग कर सजाना एक बेहतर विकल्प है। इन्हें और बढ़िया लुक देने के लिए छोटे-छोटे शीशे या टूटी चूड़ियों को भी चिपका कर अपनी कलात्मक अभिरुचि का परिचय दे
सकते हैं।

फर्नीचर को करें री-अरेंज

घर के फर्नीचर को नया लुक देने के लिए उनको कुछ अलग तरीके से री-अरेंज करना एक बेहतर आइडिया है। इससे आपके ड्राइंग रूम की लुक में एक नयापन आ जाएगा। सोफे के यदि आप कवर नहीं बदल पाए हैं तो कुशन कवर बदलना भी काफी होगा। अगर लिविंग एरिया और डाइनिंग एरिया का आपस में स्थान परिवर्तन हो जाए तो भी एक नया लुक आ जाएगा।

कंडील की जगमगाहट

कंडील का दिवाली की सजावट में एक महत्त्वपूर्ण स्थान है। मुख्य द्वार पर एक छोटी-सी कंडील या लालटेन की जगमगाहट लाजवाब होती है। अंदर ड्राइंग रूम में अच्छे आकार की कंडील सजाने से घर जगमगा उठेगा।

फूलों से सजावट

दीपावली के दिनों में फूलों की सजावट इनडोर में करें। हर रोज नये फ्लावर चुनें। गुलाब, लिली, जैस्मीन के साथ घर में रंगों को बिखेर दें। फूलों के खुशनुमा एहसास का विकल्प कोई भी अन्य चीज नहीं कर सकती।

बनाएं लड़ियों और दीयों का कॉम्बिनेशन

दिवाली रोशनी का त्योहार है और घर के बाहर की शोभा रोशनी से ही होती है। मिट्टी के दीये हर घर में परंपरागत रूप से जलाये जाते हैं। कुछ लोग मोमबत्तियों का भी इस्तेमाल करते हैं। बिजली के बल्बों की लड़ी और दीयों का कॉम्बिनेशन बनाया जा सकता है। इसका इफैक्ट काफी अच्छा होगा।

दिवाली पर गिफ्ट

मिठाइयां दिवाली की सदाबहार गिफ्ट आइटम्स हैं, मगर इन्हें दिवाली पर कई रोज पहले ही बना लिया जाता है, इसलिए दूध या छैने की मिठाइयां खरीदने से बचें। देशी घी से बनी मिठाइयां खरीदें।

मिठाई, नमकीन और बिस्कुट्स के कॉम्बी पैक आजकल काफी लोकप्रिय होने जा रहे हैं। इनके आकार बड़े हैं और दाम छोटे। रसगुल्ला, सोन पापड़ी, गुलाब जामुन, भुजिया, बिस्कुट व पेठे आदि के कॉम्बी बाजार में भरे पड़े हैं।

ड्राई फ्रूट पैक्स दिवाली गिफ्ट के रूप में दिन-ब-दिन लोकप्रिय होते जा रहे हैं। इस बार कई कम्पनियों ने विदेशी काजू, बादाम व पिस्ता के आकर्षक पैक्स बाजार में उतारे हैं। क्वालिटी बेहतरीन है, मगर थोड़ी महंगी है।

बिस्कुट-चॉकलेट का चलन भी बढ़ता जा रहा है, मगर विदेशी पैक्स की एक्सपायरी डेट्स संदेहास्पद रहती हैं। अपने लोकल बेकर से कुकीज बास्केट खरीदना एक अच्छा चयन होगा। हर अच्छे बेकर ने कुकीज और फ्रेश चॉकलेट व केक्स की शानदार वैरायटी निकाली हैं।

परफ्यूम्ड कैंडल्स की बेशुमार वैरायटी मार्केट में आ गई है। दिवाली पर यह अच्छे उपहार के रूप में लोकप्रिय होती जा रही है। कैंडल होल्डर्स भी गिफ्ट किए जाते हैं।

होम लिनेन यानी बैड शीट, कुशन और पिलो कवर्स की स्पेशल वैरायटी दिवाली के दिनों में लॉन्च हुई है और वह भी आकर्षक दामों में। सभी फर्निशिंग स्टोर्स पर इनकी वैरायटी उपलब्ध है।

क्रॉकरी या होम अप्लायंसेज की बहुत अच्छी वैरायटी हर बड़े स्टोर में गिफ्ट पैक के रूप में मौजूद है। इम्पोर्टेड क्रॉकरी खरीदने के लिए गफ्फार मार्केट, करोल बाग से बढ़िया कोई ठिकाना नहीं है।

चांदी-सोने के आयटम्स में सिक्कों के अलावा अब 500-1000 के चांदी के नोट भी ज्वैलर्स के पास उपलब्ध हैं। चांदी-सोने की धार्मिक मूर्तियां और तस्वीरें भी गिफ्ट करने का अच्छा ऑप्शन है।

सूट लेंथ, शर्ट-पैन्ट सेट व रिस्ट वॉच ऐसे उपहार हैं, जो अपने सहयोगियों या वर्कर्स को दिवाली के शुभ मौके पर दिए जा सकते हैं। गारमेंट्स स्टोर्स में इनकी अच्छी वैरायटी उपलब्ध है।

इन सबके अतिरिक्त मेकअप किट्स, ब्यूटी प्रोडक्ट्स और परफ्यूम्स व डिओज के गिफ्ट हैम्पर भी दिवाली पर दिए जाने वाले उपहारों में लोकप्रिय हैं।

घर का लुक बदलने के लिए आसान टिप्स

घर के पायदान बदल कर नए लगाएं।
सोफों के कुशन कवर बदलें।
फर्नीचर को पुनर्व्यवस्थित करें।
मिट्टी के बड़े दीये अपने आप पेंट करके सजाएं।
घर के इनडोर प्लांट्स के गमले पेंट करें।
परदों का कॉम्बिनेशन बदल दें। उन पर कागज के मोटिफ भी लगा सकते हैं।

दिवाली में सजावट के लिए जरूरी

कंडील
फूल
दीये
वंदनवार
रंगोली
लाइटिंग
मोटिफ्स
फ्लोटिंग कैंडल्स

(यह लेख हिंदुस्तान के नवम्बर के अंक में प्रकाशित हुआ है.)

Thursday, October 21, 2010

छोड़ो मस्ती दिखाओ चुस्ती
सुबोध भारतीय
First Published:20-10-10 02:05 PM
Last Updated:20-10-10 02:05 PM
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भरपूर मस्ती, स्कूल से छुट्टी और हर ओर बस खेल की चर्चा। कितना अच्छा वक्त था ना! न सुबह-सुबह वक्त पर स्कूल पहुंचने की टेंशन और न ही स्कूल के बाद टय़ूशन जाने की भागमभाग। पर, अब बहुत हो गई मौज-मस्ती। स्कूल खुल गए हैं और फिर से लौट आया है वही पुराना टाइम-टेबल। अब टाइम-टेबल को फॉलो करना है, स्कूल से लेकर खेल के मैदान तक अव्वल आना है, तो हेल्दी रहना भी तो जरूरी है ना! हेल्दी रहना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। किसी को डेंगू हो रहा है, तो किसी को चिकनगुनिया। साथ में बदलते मौसम की मार। तुम हेल्दी रहो, यह सिर्फ पेरेंट्स की ही जिम्मेदारी नहीं है। कैसे मौज-मस्ती के साथ चुस्त और हेल्दी भी रहा जा सकता है, बता रहे हैं सुबोध भारतीय

कॉमनवेल्थ गेम्स खत्म हो गए और साथ ही खत्म हो गईं दशहरे की लंबी छुट्टियां। इस बार छुट्टियों में बच्चों को धमाल मचाने का शानदार मौका मिला। जिन्हें स्पोर्ट्स में रुचि थी, वे खेल देखने जा सकते थे और जिनके पेरेंट्स इन लंबी छुट्टियों में घर से निकलना चाहते थे, उन्हें मिला सैर-सपाटे के लिए दूर-दराज के इलाकों में जाने का मौका। बच्चों के तो मानो दोनों हाथों में लड्डू थे। पढ़ाई से तो मानो नाता ही टूट गया था और हर तरफ बस धमा-चौकड़ी, मौज-मस्ती और खाना-पीना था। मगर जैसे हर अच्छी चीज का अंत होता है, इन छुट्टियों का भी अंत हुआ और बच्चों की वही दुनिया शुरू हो गई, सुबह 6 बजे से।

पर, अब आपको एक चीज का ख्याल रखना होगा-बदलते मौसम का। दिन छोटे होने लगे हैं और रातें बड़ी। दिन में गरमी लगती है और रात को पंखा भी धीमा करना पड़ता है। मच्छरों की तो न जाने कितनी किस्में पैदा हो गई हैं। हर रोज डेंगू, चिकनगुनिया और वायरल फीवर के केस सुनने को मिल रहे हैं और सबसे चिंता की बात यह है कि बच्चे भी इन रोगों के शिकार हो रहे हैं। अगर थोड़ी-सी सावधानी बरती जाए तो इन रोगों से और मच्छरों से बचा जा सकता है।

टी-शर्ट और निक्कर पहनना किस बच्चे को अच्छा नहीं लगता? मगर मच्छरों को भी यह अच्छा लगता है और वह आसानी से उन बच्चों को अपना शिकार बनाते हैं, जो ऐसे कपड़े पहनते हैं। डेंगू, चिकनगुनिया आदि रोग मच्छरों के काटने से ही होते हैं। खेलकर आने के बाद पसीने से भीगे हुए बच्चे अभी भी फ्रिज का ठंडा पानी पीकर अपना गला खराब कर लेते हैं। गला खराब होता है और फिर फीवर की बारी आती है और उसके बाद हो जाती है स्कूल से अनचाही छुट्टी। इतनी लंबी छुट्टियों के बाद दोबारा छुट्टी करने का मतलब-क्लास में पीछे रह जाना और पढ़ाई का नुकसान।

प्रसिद्ध होम्योपैथी डॉक्टर अनीता यादव का कहना है- ‘इन दिनों दिन और रात के तापमान में काफी अंतर आ चुका है। खांसी, जुकाम और एलर्जी की शिकायतें बच्चों में कॉमन हो गई हैं। इसका कारण है हमारे शरीर में इन दिनों विटामिन-सी की कमी हो जाती है। इसलिए इन दिनों में बच्चों को नींबू-पानी, मौसमी, संतरा आदि निरंतर लेना चाहिए, जो विटामिन-सी के सबसे अच्छे स्नोत हैं। विटामिन सी से आपकी त्वचा भी हेल्दी रहेगी।

हेल्दी लाइफ के लिए हेल्दी खाना

मौसम चाहे कोई भी हो, हेल्दी रहने और बीमारियों से दूर रहने के लिए अच्छा और पौष्टिक खाने से बेहतर कोई और उपाय नहीं है। कभी-कभार पित्जा-बर्गर खाना ठीक है, पर इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए ऐसी डाइट लें जो आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत बना सके। तभी तो तुम हेल्दी रहोगे और हर फील्ड में आओगे अव्वल।

आजकल के बच्चे स्मार्ट भी हैं और अपनी हेल्थ का ख्याल भी रखना जानते हैं। इन टिप्स को अपनाने से आप हेल्दी रह सकते हैं।

बदलते मौसम को देखते हुए फ्रिज का ठंडा पानी पीना एकदम छोड़ दें और घर के एसी को अगली गर्मियों तक की छुट्टी दे दें।

मच्छर इन दिनों आतंकवादी बन गए हैं और इस मौसम में सबसे ज्यादा एक्टिव रहते हैं। इनसे बचने के लिए कोशिश करें कि पूरी बाजू की शर्ट और पैंट पहनें। यदि ऐसा करना संभव न हो तो मच्छरों से बचाने वाली क्रीम को खुले अंगों पर लगा लें।

शाम 5 से 6 बजे के बीच मच्छर घरों में घुस जाते हैं। इस दौरान घर का कोई भी दरवाजा-खिड़की खुला ना रखें।

कम-से-कम एक महीने के लिए आउटडोर गेम्स को छोड़ दें, मच्छरों से बचाव रहेगा। बदलते मौसम के असर से भी बचेंगे।

इस मौसम में भूख बढ़ जाती है, मगर इसका मतलब यह नहीं कि जंक फूड जैसे पित्जा, बर्गर या समोसा ही खाया जाए। हेल्दी और पोषक तत्त्वों से भरपूर खाना खाएं।

अब आखिर में एक मजेदार बात-आजकल सुबह का मौसम सबसे खुशगवार है। जो बच्चे मॉर्निग वॉक या एक्सरसाइज शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए इससे बढ़िया मौसम कोई नहीं हो सकता। सुबह या शाम किसी भी समय एक्सरसाइज और वॉक करने का सुहाना मौसम है ये।

(यह लेख दैनिक हिंदुस्तान में २१ अक्टूबर को प्रकाशित हुआ है)