हमेशा पास रहते हैं मगर पल-भर नहीं मिलते
बहुत चाहो जिन्हें दिल से वही अक्सर नहीं मिलते
ज़रा ये तो बताओ तुम हुनर कैसे दिखाएँ वो
यहाँ जिन बुत-तरासों को सही पत्थर नहीं मिलते
हमें ऐसा नहीं लगता यहाँ पर वार भी होगा
यहाँ के लोग हमसे तो कभी हँसकर नहीं मिलते
हमारी भी तमन्ना थी उड़ें आकाश में लेकिन
विवश होकर यही सोचा सभी को पर नहीं मिलते
ग़ज़ब का खौफ छाया है हुआ क्या हादसा यारो
घरों से आजकल बच्चे हमें बाहर नहीं मिलते
हकीकत में उन्हें पहचान अवसर की नहीं कुछ भी
जिन्होंने ये कहा अक्सर, हमें अवसर नहीं मिलते
I am a person, with a happy go lucky attitude. I am extremely positive and passionate person. I believe in good human relationship. I am fond of reading books on various subject. I also write as a freelancer in Hindi.
Monday, February 6, 2012
वक़्त लग जाएगा जगाने में
लोग सोए हैं इस ज़माने में
ख्व़ाब सबके हसीन होते हैं
उम्र लगती है उनको पाने में
दुश्मनों को भी मात करते हैं
दोस्त कैसे हैं इस ज़माने में
अब जो हमदर्द बनके आए हैं
वो भी शामिल हैं घर जलाने में
लोग इतना नहीं समझ पाते
क्या बिगड़ता है मुस्कराने में
सच को सच जो 'तुषार' कहते हैं
वो ही रहते हैं अब निशाने में
लोग सोए हैं इस ज़माने में
ख्व़ाब सबके हसीन होते हैं
उम्र लगती है उनको पाने में
दुश्मनों को भी मात करते हैं
दोस्त कैसे हैं इस ज़माने में
अब जो हमदर्द बनके आए हैं
वो भी शामिल हैं घर जलाने में
लोग इतना नहीं समझ पाते
क्या बिगड़ता है मुस्कराने में
सच को सच जो 'तुषार' कहते हैं
वो ही रहते हैं अब निशाने में
जिनके घर आइना नहीं होता
उनको अपना पता नहीं होता
तब खुद़ा को ही याद करते हैं
जब कोई रास्ता नहीं होता
वक़्त के सब .गुलाम होते हैं
उससे कोई बड़ा नहीं होता
सोचना है दिमाग से सोचो
दिल से कुछ फ़ैसला नहीं होता
वक़्त हमको बुरा बनाता है
शख्स़ कोई बुरा नहीं होता
ज़िन्दगी भर 'तुषार' क्या रोना
उससे कुछ फ़ायदा नहीं होता
उनको अपना पता नहीं होता
तब खुद़ा को ही याद करते हैं
जब कोई रास्ता नहीं होता
वक़्त के सब .गुलाम होते हैं
उससे कोई बड़ा नहीं होता
सोचना है दिमाग से सोचो
दिल से कुछ फ़ैसला नहीं होता
वक़्त हमको बुरा बनाता है
शख्स़ कोई बुरा नहीं होता
ज़िन्दगी भर 'तुषार' क्या रोना
उससे कुछ फ़ायदा नहीं होता
ऐसा नहीं कि उन से मोहब्बत नहीं रही
जज़्बात में वो पहले-सी शिद्दत नहीं रही
सर में वो इंतज़ार का सौदा नहीं रहा
दिल पर वो धड़कनों की हुक़ूमत नहीं रही
पैहम तवाफ़े-कूचा-ए-जानाँ के दिन गए
पैरों में चलने-फिरने की ताक़त नहीं रही
चेहरे की झुर्रियों ने भयानक बना दिया
आईना देखने की भी हिम्मत नहीं रही
कमज़ोरी-ए-निगाह ने संजीदा कर दिया
जलवों से छेड़-छाड़ की आदत नहीं रही
अल्लाह जाने मौत कहाँ मर गई 'ख़ुमार'
अब मुझको ज़िन्दगी की ज़रूरत नहीं रही
जज़्बात में वो पहले-सी शिद्दत नहीं रही
सर में वो इंतज़ार का सौदा नहीं रहा
दिल पर वो धड़कनों की हुक़ूमत नहीं रही
पैहम तवाफ़े-कूचा-ए-जानाँ के दिन गए
पैरों में चलने-फिरने की ताक़त नहीं रही
चेहरे की झुर्रियों ने भयानक बना दिया
आईना देखने की भी हिम्मत नहीं रही
कमज़ोरी-ए-निगाह ने संजीदा कर दिया
जलवों से छेड़-छाड़ की आदत नहीं रही
अल्लाह जाने मौत कहाँ मर गई 'ख़ुमार'
अब मुझको ज़िन्दगी की ज़रूरत नहीं रही
ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा ही नहीं,
और क्या जुर्म है पता ही नहीं|
इतने हिस्सों में बट गया हूँ मैं,
मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं|
ज़िन्दगी! मौत तेरी मंज़िल है
दूसरा कोई रास्ता ही नहीं
सच घटे या बड़े तो सच न रहे,
झूठ की कोई इन्तहा ही नहीं|
ज़िन्दगी! अब बता कहाँ जाएँ
ज़हर बाज़ार में मिला ही नहीं
जिसके कारण फ़साद होते हैं
उसका कोई अता-पता ही नहीं
धन के हाथों बिके हैं सब क़ानून
अब किसी जुर्म की सज़ा ही नहीं
कैसे अवतार कैसे पैग़म्बर
ऐसा लगता है अब ख़ुदा ही नहीं
उसका मिल जाना क्या, न मिलना क्या
ख्वाब-दर-ख्वाब कुछ मज़ा ही नहीं
जड़ दो चांदी में चाहे सोने में,
आईना झूठ बोलता ही नहीं|
अपनी रचनाओं में वो ज़िन्दा है
‘नूर’ संसार से गया ही नहीं
और क्या जुर्म है पता ही नहीं|
इतने हिस्सों में बट गया हूँ मैं,
मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं|
ज़िन्दगी! मौत तेरी मंज़िल है
दूसरा कोई रास्ता ही नहीं
सच घटे या बड़े तो सच न रहे,
झूठ की कोई इन्तहा ही नहीं|
ज़िन्दगी! अब बता कहाँ जाएँ
ज़हर बाज़ार में मिला ही नहीं
जिसके कारण फ़साद होते हैं
उसका कोई अता-पता ही नहीं
धन के हाथों बिके हैं सब क़ानून
अब किसी जुर्म की सज़ा ही नहीं
कैसे अवतार कैसे पैग़म्बर
ऐसा लगता है अब ख़ुदा ही नहीं
उसका मिल जाना क्या, न मिलना क्या
ख्वाब-दर-ख्वाब कुछ मज़ा ही नहीं
जड़ दो चांदी में चाहे सोने में,
आईना झूठ बोलता ही नहीं|
अपनी रचनाओं में वो ज़िन्दा है
‘नूर’ संसार से गया ही नहीं
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