किसी भी झील से हँसते कमल निकालता हूं
मैं हर ज़मीन में अच्छी ग़ज़ल निकालता हूं
चलो कि मैं ही जलाता हूं ख़ून से ये चराग़
चलो कि मैं ही अंधेरे का हल निकालता हूं
बना के बांध तुझे झील करके छोड़ूंगा
ज़रा सा ठहर नदी तेरे बल निकालता हूं
ये हो भी सकता है इस बार दांव लग जाएमैं पांसे फेंक के फिर से रमल निकालता...
I am a person, with a happy go lucky attitude. I am extremely positive and passionate person. I believe in good human relationship. I am fond of reading books on various subject. I also write as a freelancer in Hindi.
Friday, August 26, 2011
Monday, February 14, 2011
टैरेस गार्डन: इस शौक का अंदाजे बयां और
सुबोध भारतीय
First Published:14-02-11 02:01 PM
Last Updated:14-02-11 02:04 PM
अपने घर की बालकनी में बैठकर चाय पीने का मजा ही कुछ और होता है। और अगर ऐसे में आपकी छत या बालकनी पर टैरेस गार्डन बना हो तो उन चुस्कियों का मजा ही दूना हो जाएगा। तो क्यों न हम अपनी छत या बालकनी पर एक ऐसा टैरेस गार्डन बनाएं, जिससे हम चाय की चुस्कियों के साथ-साथ प्रकृति का भी आनन्द ले सकें। बस जरूरत है अपनी कल्पना शक्ति की। वैसे भी अगर आप हरियाली से दूर हैं तो अपनी छत या बालकनी को टैरेस गार्डन का रूप दे सकते हैं। कैसे, आइये एक नजर डालते हैं
टैरेस गार्डन यानी छत पर हरियाली। टैरेस गार्डन बनाने के लिए छत पर घास उगाना जरूरी नहीं। छत के फर्श की अच्छी वॉटर प्रूफिंग करवाने के बाद किसी भी आकार की छत या उसके हिस्से को आसानी से टैरेस गार्डन का रूप दिया जा सकता है। यदि आपकी बालकनी चार-पांच सौ वर्ग फुट की है तो उसे भी टैरेस गार्डन के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है।
आसान तरीका
छत पर गार्डन बनाने के लिए आप छत के चारों ओर पैरागोल बनवाएं। इसमें एक स्टील का ढांचा होता है, जिसमें लटकने वाले गमले लटका दिये जाते हैं। यह गमले बास्केट टाइप के होते हैं। इन बास्केट्स में जेड, बटन कैक्टस के अलावा अन्य लटकने वाले पौधे भी उगाए जाते हैं। इससे छत के चारों ओर हरियाली हो जाएगी। पैरागोल के ऊपर हरे रंग का प्लास्टिक का मेश (जाली) बिछाने से ग्रीन हाउस तैयार हो जाएगा। नीचे फर्श पर इनडोर प्लांट्स के गमले लगाने चाहिए। इनमें कछुए, मेंढक, हाथी आदि के आकार के मिट्टी के गमले लगा देने से सुंदरता बढ़ जाएगी। दीवार पर कुछ रॉट आयरन के स्टैण्ड्स व हुक भी लगाए जा सकते हैं, जिनमें छोटे-छोटे गमले लटकाए जा सकते हैं।
फर्श पर सेरेमिक, ग्रेनाइट्स व गजीबो लगा कर बेहतरीन लुक दिया जा सकता है। जिन लोगों को लैंड- स्केपिंग अच्छी लगती है और कृत्रिम झरने आदि लगाना चाहते हैं, वह एक अच्छे लैंडस्केपिंग आर्किटेक्स से यह कार्य करवा सकते हैं। इसमें फाउंटेन और मूर्तियों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
स्थायी रूप
स्थायी रूप से टैरेस गार्डन बनाने की प्लानिंग आपको घर के निर्माण के साथ ही करनी होगी, क्योंकि इसकी छत जिस पर गार्डन का आधार बनाया जाएगा, बहुत मजबूत और इस योग्य होनी चाहिए कि वह लोड ले सके। पानी की निकासी के लिए ढलान भी होनी आवश्यक है। स्थायी टैरेस गार्डन में फर्श पर घास भी उगाई जा सकती है। प्रसिद्ध लैंडस्केपिंग आर्किटेक्ट दिनेश भारद्वाज के अनुसार, स्थाई टैरेस गार्डन बनाते समय सबसे जरूरी वॉटर प्रूफिंग है। टैरेस गार्डन के फर्श की सात लेयर वॉटरप्रूफिंग टीटमेंट होती है। वॉटर प्रूफिंग वाली छत के निर्माण के दौरान ही वॉटर ड्रेनेज सिस्टम बना लिया जाता है, जिससे कभी भी फर्श में पानी न रुके।
एक बार वॉटर प्रूफिंग होने के बाद आप उस पर मिट्टी डाल कर घास उगा सकते हैं और छोटे-छोटे पौधे भी। कुछ लोग बोन्साई पेड़ भी उगाते हैं, जिन्हें कई वास्तुशास्त्री उचित नहीं मानते। जापानी व चाइना शैली में टपोरी प्लांट भी उगाए जा सकते हैं। हरा बांस, डांसिंग और गोल्डन बैम्बू व फाइकस टैरेस गार्डन में अक्सर लगाए जाते हैं।
आपके टैरेस गार्डन में हरियाली तो छा गई, मगर बहार आएगी फूलों के रंगों से। गेंदा, गुलाब, गुलदाऊदी आदि फूलों की रंगीन छटा गार्डन की सुन्दरता कई गुना बढ़ा देगी। इसी प्रकार चम्पा, चमेली, जूही और मौलसिरी की लताएं टैरेस गार्डन को सम्पूर्णता प्रदान करती हैं।
लाइटिंग
टैरेस गार्डन में लाइटिंग का भी बहुत बड़ा योगदान है। शाम के धुंधलके के साथ जब रात जवान होती है तो रोशनी का खूबसूरत संयोजन माहौल को और भी खुशनुमा बना देता है। प्लास्टिक, वुड और रॉट आयरन का गार्डन फर्नीचर टैरेस गार्डन का अभिन्न अंग है। इसका चयन अपनी अभिरुचि के अनुसार करें। पीने-पिलाने के शौकीन अपना एक छोटा सा बार भी यहीं बना सकते हैं।
आपका टैरेस गार्डन कितना सुंदर है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आपके मेहमान आपके ड्राइंग रूम में बैठना पसंद करते हैं अथवा आपके टैरेस गार्डन में बैठने का हठ करते हैं। वैसे कभी-कभार बिन बुलाए मेहमानों जैसे तोता, मोर आदि का आगमन भी आपको खुशी देगा और इस बात की पुष्टि भी करेगा कि आपका गार्डन सही बना है। इनके स्वागत के लिए पीने के पानी के सुंदर से बर्तन अवश्य सजाएं। ये बातें जरूर ध्यान रखें
सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आपके घर की छत मजबूत हो और वह गार्डन का लोड ले सके।
छत पर ऐसी ढलान होनी आवश्यक है, जिससे पानी की निकासी हो सके।
स्थायी टैरेस गार्डन बनाने के लिए छत पर सेवन लेयर्स की वॉटर प्रूफिंग किसी विशेषज्ञ से करवानी चाहिए।
अधिक धूप से पौधों को बचाने के लिए ग्रीन हाउस बनाएं।
टैरेस गार्डन बनाते समय अपनी कल्पनाशक्ति का भरपूर उपयोग करें और इनमें पौधों, फूलों और पत्थरों का भी खूबसूरत संयोजन करें।
टैरेस गार्डन: इस शौक का अंदाजे बयां और
सुबोध भारतीय
First Published:14-02-11 02:01 PM
Last Updated:14-02-11 02:04 PM
अपने घर की बालकनी में बैठकर चाय पीने का मजा ही कुछ और होता है। और अगर ऐसे में आपकी छत या बालकनी पर टैरेस गार्डन बना हो तो उन चुस्कियों का मजा ही दूना हो जाएगा। तो क्यों न हम अपनी छत या बालकनी पर एक ऐसा टैरेस गार्डन बनाएं, जिससे हम चाय की चुस्कियों के साथ-साथ प्रकृति का भी आनन्द ले सकें। बस जरूरत है अपनी कल्पना शक्ति की। वैसे भी अगर आप हरियाली से दूर हैं तो अपनी छत या बालकनी को टैरेस गार्डन का रूप दे सकते हैं। कैसे, आइये एक नजर डालते हैं
टैरेस गार्डन यानी छत पर हरियाली। टैरेस गार्डन बनाने के लिए छत पर घास उगाना जरूरी नहीं। छत के फर्श की अच्छी वॉटर प्रूफिंग करवाने के बाद किसी भी आकार की छत या उसके हिस्से को आसानी से टैरेस गार्डन का रूप दिया जा सकता है। यदि आपकी बालकनी चार-पांच सौ वर्ग फुट की है तो उसे भी टैरेस गार्डन के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है।
आसान तरीका
छत पर गार्डन बनाने के लिए आप छत के चारों ओर पैरागोल बनवाएं। इसमें एक स्टील का ढांचा होता है, जिसमें लटकने वाले गमले लटका दिये जाते हैं। यह गमले बास्केट टाइप के होते हैं। इन बास्केट्स में जेड, बटन कैक्टस के अलावा अन्य लटकने वाले पौधे भी उगाए जाते हैं। इससे छत के चारों ओर हरियाली हो जाएगी। पैरागोल के ऊपर हरे रंग का प्लास्टिक का मेश (जाली) बिछाने से ग्रीन हाउस तैयार हो जाएगा। नीचे फर्श पर इनडोर प्लांट्स के गमले लगाने चाहिए। इनमें कछुए, मेंढक, हाथी आदि के आकार के मिट्टी के गमले लगा देने से सुंदरता बढ़ जाएगी। दीवार पर कुछ रॉट आयरन के स्टैण्ड्स व हुक भी लगाए जा सकते हैं, जिनमें छोटे-छोटे गमले लटकाए जा सकते हैं।
फर्श पर सेरेमिक, ग्रेनाइट्स व गजीबो लगा कर बेहतरीन लुक दिया जा सकता है। जिन लोगों को लैंड- स्केपिंग अच्छी लगती है और कृत्रिम झरने आदि लगाना चाहते हैं, वह एक अच्छे लैंडस्केपिंग आर्किटेक्स से यह कार्य करवा सकते हैं। इसमें फाउंटेन और मूर्तियों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
स्थायी रूप
स्थायी रूप से टैरेस गार्डन बनाने की प्लानिंग आपको घर के निर्माण के साथ ही करनी होगी, क्योंकि इसकी छत जिस पर गार्डन का आधार बनाया जाएगा, बहुत मजबूत और इस योग्य होनी चाहिए कि वह लोड ले सके। पानी की निकासी के लिए ढलान भी होनी आवश्यक है। स्थायी टैरेस गार्डन में फर्श पर घास भी उगाई जा सकती है। प्रसिद्ध लैंडस्केपिंग आर्किटेक्ट दिनेश भारद्वाज के अनुसार, स्थाई टैरेस गार्डन बनाते समय सबसे जरूरी वॉटर प्रूफिंग है। टैरेस गार्डन के फर्श की सात लेयर वॉटरप्रूफिंग टीटमेंट होती है। वॉटर प्रूफिंग वाली छत के निर्माण के दौरान ही वॉटर ड्रेनेज सिस्टम बना लिया जाता है, जिससे कभी भी फर्श में पानी न रुके।
एक बार वॉटर प्रूफिंग होने के बाद आप उस पर मिट्टी डाल कर घास उगा सकते हैं और छोटे-छोटे पौधे भी। कुछ लोग बोन्साई पेड़ भी उगाते हैं, जिन्हें कई वास्तुशास्त्री उचित नहीं मानते। जापानी व चाइना शैली में टपोरी प्लांट भी उगाए जा सकते हैं। हरा बांस, डांसिंग और गोल्डन बैम्बू व फाइकस टैरेस गार्डन में अक्सर लगाए जाते हैं।
आपके टैरेस गार्डन में हरियाली तो छा गई, मगर बहार आएगी फूलों के रंगों से। गेंदा, गुलाब, गुलदाऊदी आदि फूलों की रंगीन छटा गार्डन की सुन्दरता कई गुना बढ़ा देगी। इसी प्रकार चम्पा, चमेली, जूही और मौलसिरी की लताएं टैरेस गार्डन को सम्पूर्णता प्रदान करती हैं।
लाइटिंग
टैरेस गार्डन में लाइटिंग का भी बहुत बड़ा योगदान है। शाम के धुंधलके के साथ जब रात जवान होती है तो रोशनी का खूबसूरत संयोजन माहौल को और भी खुशनुमा बना देता है। प्लास्टिक, वुड और रॉट आयरन का गार्डन फर्नीचर टैरेस गार्डन का अभिन्न अंग है। इसका चयन अपनी अभिरुचि के अनुसार करें। पीने-पिलाने के शौकीन अपना एक छोटा सा बार भी यहीं बना सकते हैं।
आपका टैरेस गार्डन कितना सुंदर है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आपके मेहमान आपके ड्राइंग रूम में बैठना पसंद करते हैं अथवा आपके टैरेस गार्डन में बैठने का हठ करते हैं। वैसे कभी-कभार बिन बुलाए मेहमानों जैसे तोता, मोर आदि का आगमन भी आपको खुशी देगा और इस बात की पुष्टि भी करेगा कि आपका गार्डन सही बना है। इनके स्वागत के लिए पीने के पानी के सुंदर से बर्तन अवश्य सजाएं। ये बातें जरूर ध्यान रखें
सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आपके घर की छत मजबूत हो और वह गार्डन का लोड ले सके।
छत पर ऐसी ढलान होनी आवश्यक है, जिससे पानी की निकासी हो सके।
स्थायी टैरेस गार्डन बनाने के लिए छत पर सेवन लेयर्स की वॉटर प्रूफिंग किसी विशेषज्ञ से करवानी चाहिए।
अधिक धूप से पौधों को बचाने के लिए ग्रीन हाउस बनाएं।
टैरेस गार्डन बनाते समय अपनी कल्पनाशक्ति का भरपूर उपयोग करें और इनमें पौधों, फूलों और पत्थरों का भी खूबसूरत संयोजन करें।
Saturday, January 15, 2011
धर्म और मजहब से ऊपर है बॉलीवुड का हब
सुबोध भारतीय
First Published:14-01-11 01:28 PM
Last Updated:14-01-11 01:29 PM
यह बॉलीवुड ही है, जिसमें कभी भी धर्म के नाम पर इंडस्ट्री में कभी कोई बात नहीं उठी, कलाकार की कला ही ऊपर रखी गई। राजकपूर-नरगिस, गुरुदत्त-वहीदा रहमान की जोड़ी हो या देव आनंद-सुरैया की, जनता ने इन्हें सर आंखों पर रखा। आधुनिक दौर में भी शाहरूख-काजोल, सलमान-करिश्मा और सैफ अली-करीना की जोड़ियां कम हिट नहीं रही हैं।
बॉलीवुड में हिन्दू-मुस्लिम कलाकारों में प्रेम संबंध शुरु से ही रहे हैं। राजकपूर विवाहित थे मगर नरगिस से उनके प्रेम संबंध जग जाहिर थे। देवानंद से सुरैया मरते दम तक प्यार करती रहीं और अविवाहित रहीं।
बॉलीवुड ने हर दौर में धर्म-मजहब से ऊपर उठ कर समाज के सामने सांप्रदायिक सौहार्द बनाने की कारगर कोशिश की है और इन कोशिशों को जनता ने तहे-दिल से स्वीकार भी किया। ऐसे फिल्मों और कार्यक्रमों की शानदार लोकप्रियता इस बात का सबूत है कि मनोरंजन और कला में मजहब का कोई रोल नहीं होता। जनता कला और कलाकार से ही प्रेम करती है, उसके हिन्दू या मुस्लिम होने से उसे कोई फर्क नहीं पड़ता।
मगर शुरू से ऐसा नहीं था। विभाजन से पूर्व लाहौर पंजाबी कलाकारों का गढ़ था तो कलकत्ता बंगाली कलाकारों का। बम्बई में सभी के लिए दरवाजे खुले थे, मगर विभाजन के दौरान हुए धार्मिक दंगों और मारकाट के बाद बम्बई में रह गए कलाकारों के लिए अपने मूल मुस्लिम नामों को रखना सेफ नहीं माना जाता था। यही वजह थी कि यूसुफ खान को दिलीप कुमार बनना पड़ा और हामिद को अजीत। माहजबी बानो मीना कुमारी बनीं और मुमताज बेगम मधुबाला। मगर यह आशंकाएं बेकार साबित हुईं, क्योंकि सुरैया और नरगिस अपने मुस्लिम नामों के बावजूद सुपरस्टार थीं और आज तो यह आलम है कि शाहरुख खान, आमिर खान, सलमान खान और सैफ अली खान के बिना बॉलीवुड की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
सुरैया की नानी ने भले ही देवानंद के हिन्दू होने की आड़ लेकर उनकी शादी नहीं होने दी, दिलीप कुमार और मधुबाला की प्रेम कहानी में ऐसी कोई अड़चन नहीं थी। फिर भी मधुबाला की नानी ने ये शादी नहीं होने दी, क्योंकि मधुबाला उस समय पैसे कमाने वाली स्टार थीं। बाद में मधुबाला के करियर के अंतिम दौर में उन्हें किशोर कुमार का सहारा मिला। किशोर ने यह जानते हुए कि मधुबाला दिल की मरीज हैं और थोड़े समय की ही मेहमान हैं, उनसे शादी की और उनसे प्यार करते रहे।
इसी प्रकार राजकपूर-नरगिस के प्रेम संबंध तब तक ही बने रहे, जब तक मदर इंडिया की शूटिंग के दौरान हुए हादसे के बाद नरगिस ने सुनील दत्त से शादी नहीं कर ली। इनकी वैवाहिक जोड़ी फिल्मी दुनिया की सबसे सफल जोड़ियों में गिनी जाती थी। इनके पुत्र संजय दत्त की भी दूसरी शादी दिलनवाज से हुई, जिसका नाम मान्यता रखा गया।
नासिर खान अपने समय के नामी-गिरामी प्रोड्यूसर-डायरेक्टर थे। आशा पारिख को उन्होंने ही ब्रेक दिया था। ताउम्र उनके प्रेम में पड़ने के बावजूद वह उनसे शादी नहीं कर पाईं, क्योंकि वह पहले से विवाहित थे। आज नासिर खान हमारे बीच नहीं है मगर कुंवारी आशा पारिख अब भी उनके परिवार का ख्याल रख कर अपना कर्त्तव्य निभा रही हैं।
पटौदी के नवाब मसूर अली खान भारतीय क्रिकेट के लोकप्रिय कप्तान थे और शर्मिला टैगोर फिल्म दुनिया की खूबसूरत और बेहतरीन अदाकारा। जब इनके बीच प्रेम-अंकुर फूटा तो उसे विवाह संबंध में बदलते देर न लगी। शादी के 41 साल बाद आज भी यह अटूट बंधन में बंधे हैं। इनके साहबजादे सैफ अली खान ने अपने लिए सिख अभिनेत्री अमृता सिंह को चुना। शादी के 13 साल बाद हालांकि इनका तलाक हो चुका है। आजकल इनका रोमांस करीना कपूर से चल रहा है और शादी की संभावना भी है।
सलीम-जावेद की जोड़ी फिल्म इंडस्ट्री की सबसे कामयाब स्क्रीन प्ले राइटर जोड़ी रही है। मगर एक और चीज इनके बीच कॉमन है, इनके परिवार में गैर मुस्लिम सदस्यों का होना। सलीम खान ने पहली शादी मराठन सुशीला चरक (अब सलमा) से की थी और दूसरी ईसाई हेलन से। सलीम के दूसरे पुत्र अरबाज की शादी मलायका अरोड़ा से हुई और सबसे छोटे सोहेल की सीमा से। सलीम खान ने एक हिन्दू लड़की अर्पिता को भी गोद लिया हुआ है, जबकि उनकी बड़ी बेटी अलवीरा की शादी अतुल अग्निहोत्री से हुई है। सलीम खान के बंगले में ईद से लेकर गणेश चतुर्थी तक सभी त्योहार धूमधाम से मनाए जाते हैं, जिसमें इनके तीनों पुत्र सलमान, अरबाज और सोहेल खान बढ़-चढ़ कर शिरकत करते हैं।
सलीम खान के जोड़ीदार जावेद अख्तर का पहला विवाह भी पारसी हनी ईरानी से हुआ था, जिनकी संतान फरहान और जोया अख्तर हैं। फरहान ने अपनी जीवन संगिनी हेयर ड्रेसर अधुना को बनाया, जो एक हिन्दू परिवार से है। शाहरुख खान को दिल्ली के सेंट कोलंबस स्कूल में पढ़ते हुए ही गौरी से प्यार हो गया था, मगर शादी के लिए उनके परिवार को मनाने के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़े। अंतत प्यार की जीत हुई। शाहरुख के बंगले मन्नत में होली-दीपावली, ईद से भी ज्यादा धूमधाम से मनाई जाती है।
राकेश रोशन के पड़ोस में रह रहे संजय खान ने शायद ही कभी सोचा होगा कि वह समधी बन जाएंगे। ऋतिक रोशन सुपर स्टार बनने से पहले ही अपना दिल संजय खान की बेटी सुजैन को दे चुके थे। कहो न प्यार है के हिट होते ही यह विवाह बंधन में बंध गए। आज दो पुत्रों के पिता हैं।
आमिर खान ने शादी का लड्डू दो बार चखा और दोनों बार उन्होंने हिन्दू पत्नी चुनी। रीना जुत्शी उनकी पहली पत्नी थीं, जिनके साथ 15 वर्षीय वैवाहिक जीवन बिताने के बाद उन्होंने एक पत्रकार किरन को अपनी जीवन संगिनी बनाया। पंकज कपूर की पहली शादी नीलिमा अजीम से हुई थी। दोनों स्टेज के साथी थे, प्रेम हुआ शादी हुई- शाहिद कपूर इन्हीं की संतान हैं। हालांकि बाद में इनका तलाक हो गया। बेहतरीन अदाकार नसीरूद्दीन शाह की पहली पत्नी मुस्लिम थीं, मगर ज्यादा निभी नहीं और पिछले बीस वर्षों से रत्ना पाठक के साथ सुखी वैवाहिक जीवन बिता रहे हैं।
(यह लेख हिंदुस्तान के रीमिक्स में १५ जनवरी २०११ को प्रकाशित हुआ है)
Tuesday, December 21, 2010
सत्कार और फूड फिट, तो वेडिंग सुपरहिट
सुबोध भारतीय
First Published:20-12-10 02:59 PM
Last Updated:20-12-10 03:00 PM
शादी के आयोजन में सबसे पहला सवाल यह खड़ा होता है कि शादी किसी बैंक्वेट हॉल में हो, फाइव स्टार होटल में या पण्डाल में। इसका जवाब एकदम सीधा है-दो या तीन सौ मेहमानों की गैदरिंग के लिए बैंक्वेट हॉल ठीक रहते हैं। आपका बजट अच्छा है तो फाइव स्टार होटल्स चुन सकते हैं। यदि मेहमानों की संख्या पांच-छह सौ से अधिक है तो फार्म हाउस अथवा पण्डाल में आयोजन करना ठीक रहेगा।
पंडाल या बैंक्वेट हॉल आदि की सजावट में बहुत ध्यान देना चाहिए-खासकर फूलों की अच्छी सजावट से माहौल सुंदर और खुशनुमा लगने लगता है।
जयमाला
आजकल शादियों में जयमाला के दौरान रिवॉल्विंग स्टेज पर दूल्हा-दुल्हन फूलों की वर्षा के बीच मालाओं का आदान-प्रदान करते हैं। इसी प्रकार दूसरा ट्रैन्ड इस प्रकार की स्टेज का है, जिसमें दूल्हा-दुल्हन दोनों तरफ बनी स्वचालित सीढ़ियों से ऊपर आते हैं और नीचे बनी दो स्टेजों पर डांसरों की टोली उनका स्वागत करती है। फिर वे फूलों की वर्षा के बीच मालाओं का आदान-प्रदान करते हैं। पीछे आतिशबाजी के साथ दूल्हा-दुल्हन का नाम जल उठता है।
कैटेरिंग व्यवस्था
शादी की दावत में 100-150 आइटम होना अब आम बात हो गई है। यह एक सर्वमान्य सत्य है कि एक मेहमान औसतन 300 से 400 ग्राम तक ही खा सकता है। आजकल प्रति मेहमान 1 किलो से भी अधिक भोजन की व्यवस्था की जाती है, नतीजतन 50 से 60 प्रतिशत खाना वेस्ट हो जाता है। दिल्ली की शादियों में नॉर्थ इंडियन फूड के साथ राजस्थानी, मुगलई, लखनवी, चाइनीज, साउथ इंडियन, थाई, इटैलियन, मैक्सिकन के साथ ढाबा फूड भी पेश किया जा रहा है। लाइव किचन आज का लेटेस्ट ट्रैंड है। तवा सब्जी, तवा रोटी, ढाबा दाल, तड़का दाल, पास्ता आदि सभी लाइव किचन पर उपलब्ध होता है।
स्नैक्स में अब नयापन लाने के लिए मुरादाबाद, इंदौर, राजस्थान, मुंबई के विशेष स्नैक्स काउंटर लाए जा रहे हैं। मोमोज, स्वीट कॉर्न, दौलत की चाट, ढोकला चाट, फ्लेवर्ड हुक्का आदि लेटेस्ट ट्रैंड है। पीत्जा हट और डॉमिनोज जैसे ब्रांड्स के स्टॉल भी लगाये जाने लगे हैं।
फ्रैश फ्रूट चाट आजकल का पार्टियों का जरूरी हिस्सा हैं। इसमें देसी के साथ विदेशी फ्रूट्स की बहुतायत रहती है। बादाम, खजूर, छुआरे तथा इमली इनमें लेटेस्ट एडीशन हैं। ड्रिंक्स में कैफे कॉफी डे या कोस्टा कॉफी जैसे ब्रांड्स के स्टॉल लगाये जाने लगे हैं। डेजर्ट्स में अब चार-पांच तरह के हलवे के साथ रसमलाई, राज भोग, छैना पाइस, खीर के साथ छैने की अनगिनत मिठाइयां, गजक रेवड़ी के साथ केक, पेस्ट्रीज, टारटर भी पेश किए जाने लगे हैं। आइसक्रीम के दसियों फ्लेवर तो होते ही हैं, कुल्फी की भी अनेक वैरायटी उपलब्ध होती हैं।
मेहमाननवाजी के फॉर्मूले
आने वाले हर मेहमान का स्वागत पर्सनली करने का प्रयास करे। यह कभी न भूलें कि फंक्शन भले ही आपका है, इसकी रौनक मेहमानों से ही है।
विदा होते हुए मेहमानों से पूछें कि उन्होंने भोजन किया अथवा नहीं, उनके आने के लिये उन्हें धन्यवाद दें। आपके ऐसा करने से उन्हें फंक्शन के दौरान कोई असुविधा भी हुई होगी तो वह भूल जाएंगे।
अपने फंक्शन में कोई वीआईपी गेस्ट बुलाया है तो उसके चक्कर में अन्य मेहमानों को न भूलें। वीआईपी गेस्ट से जल्द छुटकारा पा लें या उसे किसी ऐसे परिजन के हवाले कर दें जो उसकी खातिर-तवज्जो करता रहे।
अपने विशिष्ट व करीबी मेहमानों के साथ सानुरोध फोटो खिंचवाएं और उसकी एक प्रति उन्हें भी प्रेषित करें। उन्हें आपका यह अंदाज अच्छा लगेगा।
शादी के सारे कार्यक्रम निबट जाने के बाद आये हुए मेहमानों की सूची बनायें और उन्हें एक धन्यवाद पत्र लिखें, विशेष कर बाहर से आये मेहमानों को।
शादी के सारे कार्यक्रम में घर व ऑफिस के कुछ कर्मचारियों और साथियों का परदे के पीछे और सामने काफी सहयोग रहता है। ऐसे सहयोगियों की सेवाओं को नजरअंदाज न करें, उन्हें सपरिवार सादर निमंत्रित करें और हो सके तो उन्हें कोई यादगार तोहफा भी बाद में दें।
शादी के आयोजन के बाद भाजी या मिठाई बांटना एक भारी बोझ लगता है, इसलिये मेहमानों को विदा करते समय ही यह काम निबटा लें।
यह कभी न भूलें कि शादी का आयोजन एक खुशी का मौका होता है, इस मौके का लाभ उठा कर रूठे रिश्तेदारों, दोस्तों को मनाएं। अप्रिय वाद-विवाद, मनमुटावों को भुला कर पूरी मस्ती से समारोह का आनंद उठाएं।
कैसी हो कैटरिंग
यदि आप पार्टी में नॉन-वेज फूड का इंतजाम कर रहे हैं तो वेजिटेरियन मेहमानों को नजरअंदाज न करें। उनके लिए थोड़ा दूर अलग इंतजाम करें, अरीब-करीब नहीं।
यदि आपने कॉकटेल का इंतजाम किया है तो उसके चक्कर में अन्य मेहमानों का डिनर लेट न करें। उनका भी ख्याल करें। डिनर सही समय पर शुरू करा दें।
कैटेरिंग की व्यवस्था करते समय इस बात पर ज्यादा ध्यान न दें कि आइटम ज्यादा हों, बल्कि यह देखें कि आइटम खाने योग्य हों और खाने वाला उनका भरपूर आनंद ले सके।
कैटेरिंग की व्यवस्था एक अच्छे कैटेरर को सौंपने के बाद किसी जिम्मेदार व्यक्ति को भी यह जिम्मा दें कि वह एक-एक आइटम टेस्ट करके देखे कि उसमें कोई कमी तो नहीं है।
यदि प्रति प्लेट खाने का इंतजाम किया गया है तो दावत शुरू होने से पहले प्लेटों की गिनती कर लें और एक करीब व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपें कि वह उस पर दूर से नजर रखे कि कोई गड़बड़ी न हो।
चाट या स्नैक्स के कुछ स्टॉल्स पर भीड़-सी लगने की संभावना रहती है। ऐसे स्टॉल्स पर ऐसी व्यवस्था पहले से करें कि भीड़ न लगने पाए।
Friday, December 17, 2010
शादी के कार्डस भी कहते हैं बहुत कुछ
सुबोध भारतीय
First Published:06-12-10 12:45 PM
Last Updated:06-12-10 12:46 PM
आप किस लेवल की शादी करने जा रहे हैं। इसका काफी कुछ पता शादी कार्ड देख कर लग जाता है। यही वजह है कि शादी कार्डस की वैरायटी दिन-प्रतिदिन बढ़िया होती जा रही है। भारत की सबसे बड़ी शादी कार्ड मार्केट चावड़ी बाजार में 5 रुपये से लेकर 150 रुपये तक के शादी कार्ड उपलब्ध हैं। यदि आप इससे ऊपर की रेंज में जाना चाहें तो लुधियाना के फव्वारा चौक जाना होगा। यहां 50 रुपये से रेंज शुरू होकर 500 रुपये प्रति कार्ड तक जाती है। यदि आप इसके साथ मिठाई या भाजी का मैचिंग बॉक्स साथ लें तो यह रेंज 150 से लेकर 1000 रुपये तक चली जाएगी।
सबसे सस्ते कार्ड ऑफसेट प्रिंटिंग से बने होते हैं। स्क्रीन प्रिंटिंग, लीफ प्रिंटिंग और यूवी प्रिंटिंग महंगी तकनीक हैं। आजकल सभी अच्छे शादी कार्डों में इन्हीं का इस्तेमाल हो रहा है। दूल्हा-दुल्हन के नाम का लेजर कट में लोगो भी बनाया जा रहा है। मैटेलिक पेपर, साटन फैब्रिक व मैटल का भी इन शादी कार्डों में अच्छा इस्तेमाल किया जा रहा है।
शादी कार्ड के साथ मैचिंग स्वीट बॉक्स और पेपर बैग आजकल का लेटेस्ट ट्रैंड है। शादी के बाद लोगों के घर भाजी या मिठाई पहुंचाना आउट डेटेड हो गया है। इसकी बजाय लोग एडवांस में शादी कार्ड के साथ ही भाजी इत्यादि दे देते हैं। कुछ लोग शादी के समय अपने मेहमानों को विदा करते समय यह कार्य करने लगे हैं।
(यह लेख हिंदुस्तान के ६ दिसंबर के अंक में प्रकाशित हुआ है)
वेडिंग सीजन: बैंड बाजे की शान है बारातियों की जान
सुबोध भारतीय
First Published:06-12-10 12:40 PM
Last Updated:06-12-10 12:44 PM
आपके प्रियजन का रिश्ता तय हो गया। अब बारी है बारात की तैयारी की। बारात के साथ शानदार घोड़ी या बग्घी में सजा दूल्हा और सामने बैंड और ढोल की धुन पर मस्ती से नाचते बाराती। इससे शानदार नजारा शायद ही किसी अन्य देश की शादियों में देखने को मिलता है। ढोल पर होता भांगड़ा, गिद्दा तथा बैंड की धुन पर ट्विस्ट करते बाराती शादी की मस्ती को चरम सीमा पर पहुंचा देते हैं।
शादी की डेट और वेन्यू तय होते ही लड़के वालों को सबसे पहले बैंड आदि की बुकिंग करा लेनी चाहिए। शादी के बाजार में शायद यही ऐसे लोग हैं, जिनके कोई फिक्स रेट नहीं हैं। बैंड वाले अपने रेट इस बात से तय करते हैं कि आप उनसे कितने आदमियों का बैंड लेंगे और सीजन से कितना पहले आप इन्हें बुक कर रहे हैं। जैसे-जैसे सीजन करीब आता जाएगा, इनके रेट बढ़ते जाएंगे। दिल्ली स्टेट बैंड एसोसिएशन के सचिव व मास्टर बैंड के प्रमुख संजय शर्मा के अनुसार- ‘दिल्ली में सालभर में शादियों के मुहूर्त्त कुल 30 से 35 तक ही होते हैं और बैंड बजाने वाले कलाकार भी लिमिटेड ही हैं, ऐसे में सीजन के समय आदमियों के रेट बढ़ जाते हैं।’
पहले बैंड वाले और घोड़ी, लाइट्स और बग्घी वाले अलग हुआ करते थे। आजकल बैंड वाले ही सारी पार्टियों के साथ तालमेल बना कर काम करते हैं।
बैंड पार्टी 11, 21 या 31 आदमियों की होती है। इसका खर्चा प्रति व्यक्ति 500 रुपये तक आता है, जो सीजन करीब आने पर दोगुना हो जाता है। अच्छी बैंड पार्टी हर सीजन में नई वर्दियां और धुनें तैयार करती हैं और बुकिंग पार्टी को इसकी चॉइस भी देती हैं। बुकिंग में घुड़चड़ी और विदा का काम भी शामिल रहता है। फिर भी बुकिंग करते समय यह बातें खोल लें। इनका कुल खर्चा 11,000 से लेकर 31,000 रुपये तक आता है।
घोड़ी का खर्चा 1000 से 3,000 तक और 2 घोड़ों वाली बग्घी की बुकिंग तो 5000 रुपये में हो जाती है, मगर बग्घी पर होने वाली फूलों की सजावट का खर्चा अलग होता है। लोग अपने टेस्ट के अनुसार 5000 से 20000 रुपये तक की फूलों की सजावट करवाते हैं। ढोल मास्टर 500 से 1000 रुपये तक में बुक हो जाता है। लाइटिंग में जैनेरेटर के साथ 4000 से 10,000 रुपये तक का रेट चल रहा है। इनमें भी आदमियों की गिनती के हिसाब से रेट होते हैं।
(यह लेख हिंदुस्तान के ६ दिसंबर के अंक में प्रकाशित हुआ है)
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